यूपी में कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: मई में ही होंगे तबादले

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए इस साल अहम बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार तबादला प्रक्रिया को जल्दी पूरा करने की तैयारी में है, ताकि विकास योजनाओं की रफ्तार पर कोई असर न पड़े। रिपोर्ट के अनुसार नई तबादला नीति का मसौदा लगभग तैयार है और जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

मई में ही खत्म होगा तबादला सत्र

इस बार सरकार का फोकस है कि सभी विभागों में तबादले 31 मई तक पूरे कर लिए जाएं। पहले जहां यह प्रक्रिया जून तक चलती थी, वहीं अब इसे समय से पहले निपटाने की योजना बनाई गई है। इसके पीछे मुख्य कारण है राज्य की योजनाओं को तेजी से लागू करना।

बजट और योजनाओं पर रहेगा जोर

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बड़ा बजट तय किया है, जिसे समय पर जमीन पर उतारना प्राथमिकता है। इसके लिए विभागों की कार्ययोजनाओं की अंतिम तारीख 15 मई रखी गई है। ऐसे में यदि तबादले जल्दी पूरे हो जाते हैं, तो नए पदस्थापित अधिकारी बिना रुकावट काम शुरू कर सकेंगे।

पिछली नीति जैसे ही नियम

नई तबादला नीति में बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। 

एक जिले में अधिकतम 3 साल और एक मंडल में 7 साल का कार्यकाल तय रहेगा।

समूह ‘क’ और ‘ख’ के करीब 20% कर्मचारियों के तबादले हो सकते हैं।

समूह ‘ग’ और ‘घ’ के लगभग 10% कर्मचारियों को स्थानांतरण का दायरा मिलेगा।

गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हों, तो उन्हें एक ही स्थान पर रखने की कोशिश की जाएगी।

जनगणना बन सकती है चुनौती

हालांकि योजना साफ है, लेकिन इस बार तबादलों के बीच जनगणना कार्य एक बड़ा फैक्टर बन सकता है। मई के दूसरे हफ्ते से जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो रही है और कई कर्मचारी इसमें व्यस्त रहेंगे। ऐसे में कुछ मामलों में तबादले और जनगणना की जिम्मेदारियां एक-दूसरे को प्रभावित कर सकती हैं।

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