7 जिलों में खनन को मिली रफ्तार
सरकारी स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में गया, शेखपुरा, बांका, औरंगाबाद, नवादा, कैमूर और रोहतास जिलों में पत्थर खनन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। खान एवं भू-तत्व विभाग ने इन जिलों में कुल 41 भूखंड चिन्हित किए, जहां खनन संभव है। अच्छी बात यह है कि इनमें से 31 क्षेत्रों को विभिन्न विभागों से अनापत्ति (NOC) मिल चुकी है, जिससे खनन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।
कुछ क्षेत्रों में अब भी रोक
हालांकि, सभी भूखंडों को मंजूरी नहीं मिल पाई है। करीब 10 ऐसे स्थान हैं जहां खनन पर फिलहाल रोक बरकरार है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि ये इलाके या तो पर्यटन, धार्मिक या ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, या फिर पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में आते हैं। सरकार ने इन क्षेत्रों के लिए अलग से प्रक्रिया अपनाने और जरूरी अनुमति लेने के निर्देश दिए हैं।
निर्माण कार्यों पर पड़ेगा सीधा असर
अगर इन सात जिलों में खनन शुरू होता है, तो राज्य में स्टोन चिप और मेटल जैसी सामग्री की उपलब्धता बढ़ेगी। अभी तक इन सामग्रियों के लिए बिहार को काफी हद तक दूसरे राज्यों, खासकर झारखंड पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन शुरू होने से न केवल सामग्री आसानी से मिलेगी, बल्कि निर्माण लागत और समय दोनों में कमी आएगी।

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