यह एक्सप्रेस-वे लगभग 245 से 280 किलोमीटर लंबा होगा और आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया जाएगा। खास बात यह है कि इसके बनने के बाद पटना से पूर्णिया की दूरी महज 3 घंटे में तय की जा सकेगी, जो वर्तमान में काफी अधिक समय लेती है। इससे व्यापार, यात्रा और लॉजिस्टिक्स में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
यह हाई-स्पीड कॉरिडोर वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया जैसे जिलों से होकर गुजरेगा। खासकर सीमांचल क्षेत्र, जो लंबे समय से विकास के लिहाज से पीछे माना जाता रहा है, इस प्रोजेक्ट से तेजी से आगे बढ़ सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा एक्सप्रेस-वे
इस एक्सप्रेस-वे का ढांचा भी काफी मजबूत और उन्नत होगा। इसमें 21 बड़े पुल, 140 छोटे पुल, 11 रेलवे ओवरब्रिज और 300 से ज्यादा अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे ट्रैफिक सुगम रहेगा और यात्रा अधिक सुरक्षित होगी।
हाइब्रिड मॉडल पर होगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण
इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत तैयार किया जाएगा। इस मॉडल में सरकार और निजी एजेंसियां मिलकर काम करती हैं, जिससे परियोजना समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरी होने की संभावना बढ़ जाती है।
एक्सप्रेस-वे के निर्माण से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही, इसके आसपास नए इंडस्ट्रियल हब, वेयरहाउस और बिजनेस सेंटर विकसित होने की संभावना है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होगा। पटना–पूर्णिया एक्सप्रेस-वे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि बिहार के विकास का नया अध्याय साबित हो सकता है।

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