करीब दो महीने से चल रहा था आंदोलन
राजस्व अधिकारियों का यह आंदोलन 9 मार्च से जारी था। इस दौरान वे अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर थे। उनकी प्रमुख मांगों में विभागीय पदों पर तैनाती और सेवा संवर्ग से जुड़े अधिकारों को लेकर असंतोष शामिल था।
विशेष रूप से डीसीएलआर और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी जैसे पदों पर राजस्व सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। अधिकारियों का कहना था कि हाल के सरकारी निर्णयों से उनके संवर्ग की भूमिका प्रभावित हो रही है।
सरकार और महासंघ के बीच बातचीत से समाधान
हड़ताल खत्म करने का फैसला सरकार और राजस्व महासंघ के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया। विभागीय स्तर पर हुई चर्चा में यह आश्वासन दिया गया कि अधिकारियों की मांगों पर विचार किया जाएगा और उन्हें उचित स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
महासंघ ने मुख्यमंत्री नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा कि राज्य सरकार राजस्व प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा सकती है।
कार्रवाई और राहत पर सहमति
हड़ताल के दौरान कई अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई थी। कुछ को निलंबित किया गया, जबकि कई पर आर्थिक दंड लगाया गया था। अब समझौते के तहत उपार्जित अवकाश में समायोजन और कुछ मामलों में दंडात्मक कार्रवाई वापस लेने पर सहमति बनी है।
सरकार को 2 महीने का समय
हालांकि हड़ताल खत्म कर दी गई है, लेकिन महासंघ ने सरकार को स्पष्ट रूप से दो महीने का समय दिया है। यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो दोबारा आंदोलन या सामूहिक अवकाश की स्थिति बन सकती है।

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