यूपी में नई व्यवस्था से प्रिंसिपल भर्ती, सरकार ने लागू किए बड़े बदलाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार ने प्रधानाचार्य और प्राचार्य भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की तैयारी की है। अब तक जहां इन पदों पर चयन केवल साक्षात्कार के आधार पर होता था, वहीं नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा को भी अनिवार्य किया जा रहा है। इससे योग्य उम्मीदवारों को अधिक निष्पक्ष अवसर मिलने की उम्मीद है।

नई भर्ती प्रणाली की खास बातें

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने एडेड माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों में भर्ती के लिए संशोधित नियमावली का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इस प्रस्ताव के अनुसार:

लिखित परीक्षा + साक्षात्कार दोनों के आधार पर चयन होगा

लिखित परीक्षा 360 अंकों की होगी

साक्षात्कार के लिए 40 अंक निर्धारित किए जाएंगे

परीक्षा में 120 प्रश्न होंगे, हर प्रश्न 3 अंक का होगा

गलत उत्तर पर 1 अंक की नेगेटिव मार्किंग भी लागू होगी

यह नई व्यवस्था सिर्फ स्कूलों के प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महाविद्यालयों में प्राचार्य और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में भी लागू की जाएगी।

पहले क्या था सिस्टम?

पहले एडेड माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य की भर्ती केवल इंटरव्यू के जरिए होती थी, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे। अब लिखित परीक्षा शामिल होने से चयन प्रक्रिया अधिक वस्तुनिष्ठ और मेरिट आधारित बन जाएगी।

बड़े पैमाने पर भर्ती की तैयारी

राज्य में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की तैयारी तेज हो गई है। करीब 1500 प्रधानाचार्य पद, 1000 से अधिक प्रधानाध्यापक पद, 100+ महाविद्यालय प्राचार्य पद। इन भर्तियों के जरिए शिक्षा संस्थानों में नेतृत्व की कमी को दूर करने की कोशिश की जाएगी।

आयोग की तैयारी और आगे की योजना

शिक्षा सेवा चयन आयोग पहले से लंबित भर्तियों की परीक्षाओं का आयोजन कर रहा है। साथ ही, नई भर्तियों के लिए भी रणनीति तैयार की जा चुकी है। जल्द ही ई-अधियाचन पोर्टल के लाइव होने के बाद विभाग ऑनलाइन प्रस्ताव भेज सकेंगे, जिसके आधार पर आयोग विज्ञापन जारी करेगा और परीक्षा तिथियां घोषित करेगा।

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