प्रदेश में अब कुल सात बड़े एक्सप्रेस-वे चालू हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 1911 किलोमीटर है। यह पूरे देश के एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश को सड़क विकास के मामले में सबसे आगे खड़ा करता है।
गंगा एक्सप्रेस-वे बना सबसे खास
गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ से प्रयागराज तक फैला हुआ है और रास्ते में कई बड़े जिलों को जोड़ता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पर 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी बनाई गई है, जहां आपात स्थिति में लड़ाकू विमान उतर सकते हैं।
इन एक्सप्रेस-वे से जुड़ा पूरा प्रदेश
उत्तर प्रदेश में आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, यमुना, गोरखपुर लिंक, मेरठ-दिल्ली और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसे बड़े मार्ग प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ रहे हैं। इन सड़कों से यात्रा का समय काफी कम हो गया है और लोगों को सीधी, तेज और सुरक्षित सुविधा मिल रही है।
कई नए मार्ग निर्माणाधीन
प्रदेश में कई नए एक्सप्रेस-वे पर काम जारी है। लखनऊ से कानपुर, दिल्ली से देहरादून और गाजियाबाद से कानपुर तक नए मार्ग बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा कई और नए मार्ग प्रस्तावित हैं, जिनके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
गांव और शहर दोनों को फायदा
इन एक्सप्रेस-वे का फायदा सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। गांवों तक भी इसका असर दिखेगा। किसानों को अपनी फसल बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी, छोटे व्यापारियों को नए बाजार मिलेंगे, उद्योगों को तेजी मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

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