हाइपरसोनिक तकनीक पर दो बड़े प्रोजेक्ट
भारत इस समय हाइपरसोनिक हथियारों के दो अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इनमें पहला है हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल और दूसरा हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल। दोनों ही तकनीकें अत्याधुनिक मानी जाती हैं और भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
ग्लाइड मिसाइल को पहले एक बूस्टर के जरिए गति दी जाती है, जिसके बाद यह बिना अतिरिक्त ऊर्जा के बेहद तेज रफ्तार से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है। बताया जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट ज्यादा उन्नत स्थिति में है और इसका पहला परीक्षण जल्द किया जा सकता है।
वहीं दूसरी तरफ हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल अभी विकास के शुरुआती चरण में है। इसमें स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग किया जा रहा है, जो उड़ान के दौरान लगातार ऊर्जा देकर मिसाइल को उच्च गति पर बनाए रखता है।
स्क्रैमजेट तकनीक में बड़ी उपलब्धि
भारत ने हाल ही में स्क्रैमजेट इंजन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है, जिसमें इंजन ने लंबे समय तक स्थिर प्रदर्शन दिखाया। यह उपलब्धि भविष्य की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल के विकास के लिए एक मजबूत आधार मानी जा रही है।
‘प्रलय’ मिसाइल अंतिम चरण में
इसके साथ ही छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘प्रलय’ भी अपने अंतिम परीक्षण चरण में पहुंच चुकी है। इसके सफल होने के बाद यह भारत की सामरिक शक्ति को और अधिक मजबूती देगी और सीमित दूरी के लक्ष्यों पर तेज प्रतिक्रिया देने में सक्षम होगी।
आगे की योजना
अधिकारियों के अनुसार, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल परियोजना को अभी औपचारिक मंजूरी मिलनी बाकी है, लेकिन इसकी तकनीकी तैयारी पहले से जारी है। मंजूरी के बाद इसके विकास में लगभग पांच वर्ष का समय लग सकता है।

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