चुनावी प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ तौर पर कहा था कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो 7वें वेतन आयोग का गठन प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। यह वादा उनकी उन प्रमुख गारंटियों में शामिल था, जिन्हें उन्होंने बंगाल के मतदाताओं के सामने रखा था।
क्या था पूरा वादा?
पूर्वी मिदनापुर की एक जनसभा में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों को केंद्र के समान वेतन संरचना देने के लिए 7वें वेतन आयोग को लागू किया जाएगा। इससे कर्मचारियों को लंबे समय से चली आ रही वेतन असमानता से राहत मिल सकती है।
अभी क्या है स्थिति?
वर्तमान में पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारी 6वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वेतन पा रहे हैं। यही वजह है कि राज्य और केंद्र के कर्मचारियों की सैलरी में अंतर बना हुआ है। ऐसे में 7वें वेतन आयोग के लागू होने से यह अंतर काफी हद तक कम हो सकता है।
अबतक के रुझानों से बंगाल में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाती दिख रही हैं। अब सबकी नजर नई सरकार के फैसलों पर टिकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 7वें वेतन आयोग का गठन कब किया जाएगा और इसकी सिफारिशें लागू होने में कितना समय लगेगा।

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