बिहार में शिक्षकों के लिए नया फरमान, नहीं मानें तो कटेगा वेतन

पटना। बिहार के शिक्षा तंत्र में सुधार और गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब चयनित शिक्षकों के लिए क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण में भाग लेना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर कोई शिक्षक इस प्रशिक्षण में शामिल नहीं होता है, तो उसके अनुपस्थित रहने वाले दिन का वेतन काटा जाएगा, साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

अनिवार्य हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम

बिहार शिक्षा विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि अगले सप्ताह से शुरू होने वाले पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में चयनित शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। यह कदम नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

स्कूलों पर नहीं पड़ेगा असर

विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि किसी भी विद्यालय में पढ़ाई प्रभावित न हो। इसलिए एक स्कूल से सीमित संख्या में ही शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा, ताकि बाकी शिक्षक नियमित रूप से कक्षाएं संचालित कर सकें।

शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण

इस वर्ष लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षकों को इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा। शेष शिक्षकों को अगले वर्ष प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह राज्य स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा शिक्षक प्रशिक्षण अभियान माना जा रहा है।

विशेषज्ञ देंगे टीचरों को ट्रेनिंग

प्रशिक्षण मॉड्यूल राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा तैयार किया गया है। वहीं प्रशिक्षण का संचालन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से किया जाएगा। इसमें विषय विशेषज्ञ, डायट के व्याख्याता और विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के विशेषज्ञ ट्रेनर के रूप में शामिल होंगे।

गुणवत्ता सुधार के लिए पहल

सरकार का मानना है कि शिक्षकों को समय-समय पर प्रशिक्षण देने से शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्र बेहतर तरीके से सीख पाएंगे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यह सेवाकालीन प्रशिक्षण अब जरूरी हिस्सा बन गया है।

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