परीक्षा ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए शिक्षक
जानकारी के अनुसार, इन शिक्षकों को विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा संचालन के लिए नियुक्त किया गया था। लेकिन केंद्राधीक्षकों की रिपोर्ट में यह सामने आया कि कई शिक्षक बिना किसी सूचना और अनुमति के अपनी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए। कुछ मामलों में यह भी पाया गया कि संबंधित शिक्षकों ने अवकाश स्वीकृत कराए बिना ही अनुपस्थिति दर्ज कराई, जिसे विभाग ने गंभीर लापरवाही माना है।
दो अलग-अलग परीक्षाओं में कार्रवाई
शिक्षा विभाग द्वारा की गई कार्रवाई में इंटर परीक्षा से जुड़े 27 शिक्षकों का वेतन 30 अप्रैल से 11 मई तक रोका गया है, जबकि मैट्रिक परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले 19 शिक्षकों का वेतन 30 अप्रैल से 6 मई तक के लिए रोक दिया गया है। इस कार्रवाई के दायरे में सहायक शिक्षक से लेकर प्रधानाध्यापक स्तर तक के कर्मचारी शामिल हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।
तीन दिन में मांगा गया स्पष्टीकरण
जिला शिक्षा कार्यालय ने सभी संबंधित शिक्षकों को तीन दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है, तो मामले को सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) में दर्ज किया जाएगा, जिसका असर उनके करियर पर पड़ सकता है।
अनुशासन को लेकर विभाग सख्त
शिक्षा विभाग का कहना है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा संचालन एक संवेदनशील प्रक्रिया है जिसमें पारदर्शिता और जिम्मेदारी सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।इसी आधार पर विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में भी यदि इस तरह की लापरवाही सामने आती है तो और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी कार्रवाई की संभावना
विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो संबंधित शिक्षकों पर 'बिहार विद्यालय परीक्षा संचालन अधिनियम 1981' के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

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