वेतन बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग
कर्मचारी पक्ष ने साफ कहा है कि न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 69,000 रुपये किया जाना चाहिए। इसके लिए 3.83 के फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह लागू होता है, तो मौजूदा 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है
इस प्रस्ताव के लागू होने पर वेतन में करीब 283% तक का इजाफा संभव बताया जा रहा है। अगर ऐसा होता है, तो यह पिछले सभी वेतन आयोगों की तुलना में सबसे बड़ा संशोधन माना जाएगा।
पेंशन में भी बड़ा बदलाव संभव
इस बदलाव का असर सिर्फ नौकरीपेशा कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। पेंशन पाने वालों को भी इसका सीधा फायदा मिल सकता है। मौजूदा न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपये है, जो बढ़कर 30 हजार रुपये से ज्यादा हो सकती है।
क्यों उठी इतनी बड़ी मांग?
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि आज के समय में खर्चों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। बच्चों की पढ़ाई पहले से ज्यादा महंगी हो गई है, इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च तेजी से बढ़ा है, किराया, यात्रा और रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, डिजिटल सेवाएं जैसे इंटरनेट अब जरूरत बन चुकी हैं। इन सब वजहों से मौजूदा वेतन को अपर्याप्त बताया जा रहा है।
सिर्फ वेतन नहीं, कई मांगे
कर्मचारी यूनियनों ने केवल सैलरी बढ़ाने की बात नहीं की, बल्कि कई अन्य बदलाव भी सुझाए हैं?
सालाना वेतन वृद्धि की दर बढ़ाई जाए।
HRA और ट्रांसपोर्ट भत्ते में सुधार किया जाए।
जोखिम वाले कामों के लिए बेहतर भत्ता मिले।
पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू किया जाए।
वेतन आयोग हर 5 साल में बनाया जाए।

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