दरअसल, इस पूरे कार्यक्रम के लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया है। इसमें शिक्षण तकनीक, कक्षा प्रबंधन, डिजिटल शिक्षा और नई शिक्षा नीति से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश
शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। निर्देश में कहा गया है कि प्रशिक्षण के लिए चयन करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि एक ही विद्यालय से सीमित संख्या में शिक्षक ही प्रशिक्षण के लिए भेजे जाएं, ताकि स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न हो। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि प्रशिक्षण और शिक्षण कार्य दोनों समान रूप से चल सकें।
नई शिक्षा नीति के तहत अनिवार्य प्रशिक्षण
विभाग के अनुसार यह प्रशिक्षण नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक है। सेवाकालीन प्रशिक्षण को हर शिक्षक के लिए अनिवार्य किया गया है ताकि शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाया जा सके।
लाखों शिक्षकों को किया जाएगा प्रशिक्षित
इस वर्ष राज्य में लगभग साढ़े तीन लाख शिक्षकों को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत शामिल किया जाएगा। शेष शिक्षकों को अगले वर्ष प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से शिक्षकों की क्षमता संवर्धन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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