अब कागजी काम खत्म, पूरा सिस्टम डिजिटल
नई व्यवस्था के तहत मरीजों के इलाज, दवा वितरण और रेफरल की पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की जाएगी। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि रिकॉर्ड रखने और जानकारी साझा करने में भी आसानी होगी। मरीजों को अब सिर्फ अपना यूनिक मेडिकल आइडेंटिफिकेशन (UMID) कार्ड और HMIS ऐप का उपयोग करना होगा, जहां उनकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री सुरक्षित रहेगी।
HMIS ऐप बनेगा पूरा मेडिकल रिकॉर्ड
HMIS (Health Management Information System) ऐप पर मरीजों की सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध रहेगी। इसमें डॉक्टर की सलाह, दवाओं की सूची, जांच रिपोर्ट और रेफरल डिटेल शामिल होंगी। इस व्यवस्था से मरीज देश के किसी भी रेलवे अस्पताल में जाकर आसानी से इलाज करा सकेंगे, क्योंकि उनकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री पहले से ही सिस्टम में उपलब्ध होगी।
UMID कार्ड से आसान पहचान और इलाज
रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों के लगभग 90 प्रतिशत लोगों के UMID कार्ड पहले ही बनाए जा चुके हैं। इस कार्ड के जरिए मरीज अपने मोबाइल पर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं और अपनी सभी मेडिकल सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। यह कार्ड मरीज की पहचान को आसान बनाता है और इलाज प्रक्रिया को तेज करता है।
डिजिटल रेफरल सिस्टम से मिलेगी सुविधा
नई व्यवस्था में रेफरल प्रक्रिया को भी डिजिटल कर दिया गया है। अब मरीजों को सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी UMID कार्ड और OTP आधारित सत्यापन के जरिए इलाज मिल सकेगा। आपात स्थिति में मरीज बिना रेफरल के भी इलाज शुरू करवा सकते हैं, जिससे गंभीर मामलों में समय की बचत होगी।
वरिष्ठ नागरिकों और गंभीर मरीजों को विशेष सुविधा
70 वर्ष से अधिक उम्र के रेल पेंशनरों को कैशलेस ओपीडी और जांच सुविधाएं दी जाएंगी, बशर्ते वे फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस प्राप्त न कर रहे हों। इसके अलावा कैंसर और ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर रोगों के मामलों में भी डिजिटल रेफरल सिस्टम लागू किया गया है, जिससे मरीजों को बार-बार प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।

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