केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी, प्रमोशन का रास्ता हुआ साफ

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इस समय दो बड़ी बातें चर्चा में हैं। एक तरफ 8वें वेतन आयोग की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर रेलवे कर्मचारियों को प्रमोशन से जुड़ी एक अहम राहत मिली है। खासकर उन कर्मचारियों के लिए यह फैसला काफी महत्वपूर्ण है, जो स्वास्थ्य कारणों से अपने मूल पद पर काम करने में सक्षम नहीं रह जाते थे।

मेडिकल आधार पर बदले पद, अब नहीं रुकेगा करियर

रेलवे में कई बार कर्मचारी बीमारी या दुर्घटना के कारण अपने मूल पद के लिए अयोग्य हो जाते हैं। ऐसे मामलों में उन्हें किसी अन्य पद पर तैनात कर दिया जाता है। पहले इस बदलाव के बाद कर्मचारियों को प्रमोशन के मामले में नुकसान उठाना पड़ता था, क्योंकि उनकी पुरानी सेवा को लेकर स्पष्ट नियम नहीं थे।

रेलवे बोर्ड का नया स्पष्टीकरण क्या कहता है?

हाल ही में जारी आदेश में रेलवे बोर्ड ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब यदि कोई कर्मचारी मेडिकल कारणों से पद बदलता है, तो उसकी पुरानी और नई, दोनों सेवाओं को जोड़कर कुल अनुभव माना जाएगा। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए दोबारा शून्य से शुरुआत नहीं करनी पड़ेगी।

प्रमोशन के लिए पात्रता बनी रहेगी

नए नियम के अनुसार, ऐसे कर्मचारी भी ग्रुप ‘बी’ स्तर के प्रमोशन के लिए पात्र होंगे, बशर्ते कि: उन्हें उसी विभाग के भीतर वैकल्पिक पद दिया गया हो, पुराना और नया दोनों पद प्रमोशन की फीडर कैटेगरी में आते हों, इससे हजारों कर्मचारियों के लिए अधिकारी बनने का रास्ता खुल गया है।

पहले क्या थी सबसे बड़ी परेशानी?

पहले स्थिति यह थी कि पद बदलने के बाद कर्मचारियों को नए पद पर अनुभव जुटाने में कई साल लग जाते थे। इससे उनकी वरिष्ठता प्रभावित होती थी और प्रमोशन की प्रक्रिया काफी पीछे चली जाती थी। कई योग्य कर्मचारी केवल तकनीकी कारणों से अवसर से वंचित रह जाते थे।

किन कर्मचारियों को फायदा?

इस फैसले का सबसे ज्यादा लाभ उन कर्मचारियों को होगा जो विभागीय परीक्षाओं या वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन की तैयारी कर रहे हैं। अब उन्हें अनुभव की कमी के कारण रोका नहीं जा सकेगा। खासतौर पर वे कर्मचारी जो सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (LDCE) के जरिए आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए यह निर्णय बेहद फायदेमंद साबित होगा

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