आम लोगों के लिए खुशखबरी! त्योहारों से पहले दालों पर कम होगी इंपोर्ट ड्यूटी

नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले दालों की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार आयात शुल्क में कटौती पर विचार कर रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। प्रस्तावित कदम का उद्देश्य बाजार में दालों की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है।

मसूर और पीली मटर पर हो सकता है फैसला

अगर सरकार आयात शुल्क घटाने का फैसला करती है तो मसूर और पीली मटर को इसका लाभ मिल सकता है। मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक मसूर और चने के आयात पर 10%, जबकि पीली मटर पर 30% शुल्क बताया गया है। वहीं, अरहर और उड़द का आयात मार्च 2027 तक शुल्क मुक्त किया गया है। चने को प्रस्तावित राहत से बाहर रखा जा सकता है।

कमजोर बारिश से उत्पादन पर चिंता

इस साल मानसून की स्थिति भी दालों की कीमतों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। जून से सितंबर के बीच प्रमुख दाल उत्पादक राज्यों में सामान्य से 30% तक कम बारिश होने की बात सामने आई है। दालों की खेती का बड़ा हिस्सा बारिश पर निर्भर होने के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

त्योहारों में बढ़ जाती है मांग

त्योहारी मौसम में दालों की खपत और मांग बढ़ जाती है। खासतौर पर चने की मांग घरेलू उपयोग के साथ-साथ मिलों और खाद्य कंपनियों की ओर से भी बढ़ती है। ऐसे में सरकार आयात के जरिए बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर सकती है।

दालों की कीमतों पर दबाव

दिए गए आंकड़ों के अनुसार अगस्त में खाद्य महंगाई 5.95% रही। इसी दौरान अरहर की कीमत में सालाना आधार पर 5.6% और उड़द की कीमत में 7.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऐसे में आयात शुल्क में संभावित कटौती से दालों की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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