बिहार में मछली पालकों को खुशखबरी, सरकार दे रही 80% सब्सिडी!

पटना। बिहार में मछली पालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए राज्य सरकार ने पहल तेज की है। अब छोटे मत्स्य पालकों को सहकारी समितियों से जोड़कर उत्पादन बढ़ाने और मछलियों की बिक्री को आसान बनाने की योजना है। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को तालाब निर्माण, मछली पालन और जरूरी उपकरणों के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है।

सहकारी समितियों के जरिए मिलेगा लाभ

सहकारिता विभाग प्रखंड और पैक्स स्तर पर विशेष फिशरी क्लस्टर तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य छोटे मछली पालकों को एक मंच पर लाना है, ताकि उन्हें उत्पादन से लेकर बाजार तक बेहतर सुविधाएं मिल सकें। सरकार की योजना के तहत मछलियों के परिवहन और बिक्री के लिए मोपेड, तिपहिया तथा चार पहिया वाहन खरीदने पर भी निर्धारित शर्तों के अनुसार विशेष सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है।

पांच लाख टन अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य

राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए पांच लाख टन अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा सारण, सिवान, मधुबनी, सुपौल, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, भागलपुर और मुंगेर में वेटलैंड क्लस्टर विकसित करने की योजना है। इसके लिए नाबार्ड से 195 करोड़ रुपये की सहायता लेने का प्रस्ताव बताया गया है।

किन लोगों को मिलेगा 80% अनुदान?

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के पात्र मछली पालकों को तालाब निर्माण तथा उपकरणों के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान मिल सकता है। अन्य योजनाओं में सब्सिडी की दर अलग हो सकती है।

आवेदन से पहले जरूरी बात: अनुदान की वास्तविक राशि, पात्रता और आवेदन की तारीख जानने के लिए बिहार के मत्स्य संसाधन विभाग या संबंधित जिला कार्यालय से जानकारी लें। सब्सिडी का लाभ संबंधित योजना के नियमों और स्वीकृति के आधार पर मिलेगा।

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