दरअसल, रेलवे कर्मचारियों की इस समस्या को एनई रेलवे मेंस कांग्रेस ने स्थायी वार्ता तंत्र (PNM) की बैठक में उठाया था। यूनियन की ओर से मामला सामने रखे जाने के बाद रेल मंडल प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया और प्रक्रिया को आसान बनाने के निर्देश दिए।
हादसे के बाद छुट्टी को लेकर नहीं होगी परेशानी
रेलवे के नियमों के मुताबिक, ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकलने और ड्यूटी पूरी कर वापस घर पहुंचने के बीच होने वाले हादसे को निर्धारित शर्तों के तहत ड्यूटी से जुड़ी दुर्घटना माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में पात्र कर्मचारी को मिलने वाला अवकाश उसके अर्जित अवकाश यानी अर्न्ड लीव से नहीं काटा जाता। इस व्यवस्था का उद्देश्य हादसे में घायल कर्मचारियों को इलाज और स्वास्थ्य लाभ के दौरान राहत देना है। आईओडी फॉर्म में कर्मचारी को दुर्घटना से जुड़ी सही जानकारी भरकर संबंधित अधिकारी को सौंपनी होगी।
दो गवाहों की शर्त भी खत्म
पहले इस सुविधा का लाभ लेने के लिए दो गवाहों की आवश्यकता होती थी। जारी आदेश के मुताबिक, अब यह शर्त भी समाप्त कर दी गई है। इससे प्रभावित कर्मचारियों के लिए प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान होने की उम्मीद है। हालांकि, रेल प्रशासन ने कर्मचारियों को आगाह किया है कि आईओडी फॉर्म में गलत या भ्रामक जानकारी देने पर कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए दुर्घटना से जुड़ी जानकारी सही और तथ्यों के आधार पर देना जरूरी होगा।
यूनियन ने उठाया था मामला
एनई रेलवे मेंस कांग्रेस के महामंत्री अखिलेश पांडेय के अनुसार, यूनियन ने बैठक में कर्मचारियों की परेशानी को उठाया था, जिसके बाद डीआरएम ने स्पष्ट निर्देश जारी किए। नए आदेश से घायल रेलकर्मियों को जरूरी फॉर्म समय पर मिलने और संबंधित प्रक्रिया पूरी करने में मदद मिलेगी।
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