यूपी में चकबंदी को लेकर बड़ा अपडेट, जमीन मालिकों के लिए खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करने और किसानों के भूमि विवादों को सुलझाने के लिए चकबंदी प्रक्रिया में तेजी आई है। चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में जहां प्रदेश के 1,925 गांवों में चकबंदी का काम पूरा हुआ था, वहीं 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 3,192 गांव हो गया। इन गांवों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीन से संबंधित अभिलेख वापस तहसीलों को सौंप दिए गए हैं।

21 लाख से ज्यादा भूमि विवादों का निस्तारण

प्रदेश में चकबंदी से जुड़े मुकदमों को सुलझाने पर भी जोर दिया गया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 तक कुल 21,12,784 मामलों का निस्तारण किया जा चुका था। जमीन के विवाद लंबे समय तक चलने से किसानों को परेशानी होती है, इसलिए मामलों का निपटारा होने से संबंधित पक्षों को राहत मिल सकती है।

531 चकबंदी न्यायालय कंप्यूटरीकृत

चकबंदी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए न्यायालयों को तकनीक से भी जोड़ा गया है। निदेशालय के अनुसार, वर्ष 2025 तक कुल 531 चकबंदी न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण किया गया। इससे न्यायालयों के कामकाज को व्यवस्थित करने और रिकॉर्ड संभालने में मदद मिल सकती है।

1,302 नए गांव चकबंदी प्रक्रिया में शामिल

पिछले आठ वर्षों में चकबंदी प्रक्रिया के विस्तार के तहत 1,302 गांवों को शामिल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इस पहल का उद्देश्य भूमि व्यवस्था को बेहतर बनाना और किसानों से जुड़े राजस्व मामलों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है।

जमीन मालिकों के लिए क्या है इसका मतलब?

चकबंदी पूरी होने का अर्थ यह है कि संबंधित गांव में जमीन के पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी कर अभिलेख तहसील को सौंप दिए गए हैं। हालांकि, इससे हर भूमि विवाद अपने आप खत्म नहीं होता। जमीन मालिकों को अपने खसरा, खतौनी और अन्य राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति संबंधित तहसील से जांचनी चाहिए।

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