बिहार के बच्चों की बल्ले-बल्ले! अब छठी से सीखेंगे कंप्यूटर, 700 स्कूलों में स्मार्ट क्लास की तैयारी

पटना। बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य के सरकारी स्कूलों में छठी और उससे ऊपर की कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य करने की योजना है। इसके साथ ही प्रदेश के 700 मॉडल स्कूलों में स्मार्ट क्लास विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के जरिए पढ़ाई करने का अवसर मिल सके।

पहले शिक्षकों को मिलेगा कंप्यूटर प्रशिक्षण

इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों को पहले एससीईआरटी में कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद वे विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जुड़ी जानकारी दे सकेंगे। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

31 मार्च तक 700 स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाने का लक्ष्य

सरकार की योजना है कि सभी 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों में 31 मार्च से पहले स्मार्ट क्लास तैयार कर ली जाएं। इसके अलावा जिन आदर्श विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है, वहां भी निर्माण कार्य कराने पर जोर दिया गया है। स्कूलों में जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित राशि का सही इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिहार में गुरुकुल और संस्कृत शिक्षा को भी मिलेगा बढ़ावा

बिहार में आधुनिक शिक्षा के साथ पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की भी तैयारी है। राज्य के प्रत्येक प्रमंडल में गुरुकुलम विद्यापीठ स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। इसकी शुरुआत बक्सर से की गई है, जहां पहले गुरुकुल की स्थापना पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके साथ ही बंद पड़े सरकारी संस्कृत विद्यालयों को दोबारा शुरू करने की तैयारी है।

इस नए बदलाव से बिहार के विद्यार्थियों को क्या होगा फायदा?

कंप्यूटर शिक्षा और स्मार्ट क्लास की व्यवस्था से विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीक समझने और पढ़ाई के नए तरीकों से जुड़ने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस योजना की सफलता शिक्षकों के प्रशिक्षण, कंप्यूटर की उपलब्धता और स्कूलों में जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने पर निर्भर करेगी।

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