पुरुषों में शुक्राणु नहीं बनने के 5 बड़े कारण, जानें क्यों आती है यह समस्या!

हेल्थ डेस्क। आजकल पुरुषों में प्रजनन संबंधी समस्याएं तेजी से चर्चा में हैं। कई पुरुषों को शादी के बाद पिता बनने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसकी एक प्रमुख वजह शुक्राणुओं (स्पर्म) का कम बनना या वीर्य में शुक्राणुओं का बिल्कुल नहीं पाया जाना हो सकती है। 

चिकित्सा भाषा में वीर्य में शुक्राणुओं की अनुपस्थिति को एजोस्पर्मिया कहा जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मामले में पुरुष पिता नहीं बन सकता। सही जांच और समय पर इलाज से कई मामलों में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं पुरुषों में शुक्राणु नहीं बनने या उनकी संख्या कम होने के पांच प्रमुख कारण।

1. हार्मोन में गड़बड़ी

पुरुषों में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में टेस्टोस्टेरोन सहित कई हार्मोन की अहम भूमिका होती है। मस्तिष्क की पिट्यूटरी ग्रंथि और हाइपोथैलेमस से निकलने वाले हार्मोन में गड़बड़ी होने पर अंडकोष में शुक्राणुओं का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कुछ मामलों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने या अन्य हार्मोन संबंधी समस्याओं के कारण भी प्रजनन क्षमता पर असर पड़ता है।

2. अंडकोष में संक्रमण या चोट

शुक्राणुओं का निर्माण अंडकोष में होता है। यदि अंडकोष को गंभीर चोट पहुंचे या कुछ संक्रमणों के कारण उसके ऊतकों को नुकसान हो, तो शुक्राणु बनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। बचपन या युवावस्था में होने वाले कुछ संक्रमण, अंडकोष में सूजन और अन्य चिकित्सकीय समस्याएं भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, अंडकोष का सामान्य रूप से विकसित न होना या उसका शरीर के बाहर स्थित थैली में न उतरना भी शुक्राणु उत्पादन में बाधा पैदा कर सकता है।

3. शुक्राणुओं के रास्ते में रुकावट

कुछ पुरुषों में अंडकोष शुक्राणु बनाते हैं, लेकिन प्रजनन मार्ग में रुकावट होने के कारण शुक्राणु वीर्य तक नहीं पहुंच पाते। इसे अवरोधक एजोस्पर्मिया कहा जाता है। यह समस्या संक्रमण, चोट, सर्जरी या जन्मजात कारणों से हो सकती है। कुछ मामलों में नसबंदी के कारण भी शुक्राणुओं का रास्ता बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति में जांच के बाद डॉक्टर रुकावट दूर करने या अन्य उपचार विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

4. आनुवंशिक समस्याएं

कुछ पुरुषों में जन्म से मौजूद आनुवंशिक गड़बड़ियां शुक्राणु उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम और वाई क्रोमोसोम के कुछ हिस्सों की कमी के कारण अंडकोष में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। कई बार ऐसी समस्याओं के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते और व्यक्ति को इसकी जानकारी तब मिलती है, जब वह संतान प्राप्ति के लिए जांच कराता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार आनुवंशिक जांच की सलाह दे सकते हैं।

5. गलत जीवनशैली और कुछ दवाओं का असर

धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, मोटापा, नींद की कमी और लंबे समय तक खराब जीवनशैली अपनाने से पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा, बिना चिकित्सकीय निगरानी के टेस्टोस्टेरोन या एनाबॉलिक स्टेरॉयड लेने से शरीर में प्राकृतिक हार्मोन उत्पादन दब सकता है, जिससे शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम हो सकती है या उनका उत्पादन रुक सकता है।

कैसे पता लगाएं कि शुक्राणु बन रहे हैं या नहीं?

शुक्राणुओं की स्थिति जानने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच वीर्य विश्लेषण (सीमेन एनालिसिस) है। यदि रिपोर्ट में शुक्राणु नहीं मिलते, तो डॉक्टर सलाह के अनुसार दोबारा जांच करा सकते हैं। इसके साथ हार्मोन की जांच, शारीरिक परीक्षण और जरूरत पड़ने पर आनुवंशिक जांच या अन्य परीक्षण किए जा सकते हैं। जांच से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि समस्या शुक्राणु बनने में है या उनके बाहर निकलने के रास्ते में।

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