चांदी आयात की मंजूरी से क्यों बढ़ी हलचल?
भारत अपनी चांदी की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में आयात की अनुमति बढ़ने से बाजार में धातु की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। कारोबारियों का मानना है कि अतिरिक्त आपूर्ति से घरेलू बाजार में चांदी के प्रीमियम पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय खरीद बढ़ने से वैश्विक कीमतों को समर्थन मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
पहले क्यों लगाई गई थीं आयात पर पाबंदियां?
इससे पहले सरकार ने चांदी के कई रूपों के आयात पर प्रतिबंध लगाए थे। बाद में चांदी के दाने और पाउडर को भी प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल किया गया। भारत की ओर से कीमती धातुओं का आयात नियंत्रित करने की कोशिशों के पीछे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और रुपये को सहारा देना भी प्रमुख कारण रहे हैं। इसी बीच, सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने से भी कारोबार पर असर पड़ा है।
कीमतों में गिरावट के बावजूद मांग कमजोर
बाजार में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच खरीदारों की मांग अभी अपेक्षाकृत कमजोर बताई जा रही है। कारोबारियों के अनुसार, हालिया गिरावट से कुछ निवेशकों को नुकसान हुआ है, जिसके कारण वे दोबारा निवेश करने में सतर्कता बरत रहे हैं। त्योहारी सीजन के बावजूद मांग में अपेक्षित तेजी नहीं दिखने से बाजार के कारोबारियों की चिंता बढ़ी है।
क्या सस्ती हो जाएगी चांदी?
अधिक आयात से देश में चांदी की उपलब्धता बढ़ सकती है और घरेलू प्रीमियम कम हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चांदी की खुदरा कीमतें निश्चित रूप से घटेंगी। कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की विनिमय दर, आयात शुल्क और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए खरीदारों और निवेशकों के लिए बाजार के रुझान पर नजर रखना जरूरी है।

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