प्रस्तावित तीनों एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 565 किलोमीटर होगी। इनके लिए लगभग 8,200 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की योजना है, जिस पर 15,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इन परियोजनाओं को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) विकसित कर रहा है।
कौन-कौन से जिले होंगे लाभान्वित?
विंध्य एक्सप्रेसवे: करीब 320 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्तावित मार्ग प्रयागराज, भदोही और मिर्जापुर होते हुए सोनभद्र तक जाएगा। इसके लिए 109 गांवों में लगभग 4,615 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने की योजना है। इससे क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे: लगभग 145 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के बीच आवागमन को सुविधा मिलेगी। इसके लिए अमरोहा और बिजनौर के 184 गांवों के अलावा हरिद्वार जिले में भी जमीन की जरूरत होगी। परियोजना के लिए करीब 2,020 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण का अनुमान है।
विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे: करीब 100 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे भी प्रस्तावित योजना का हिस्सा है। इसका उद्देश्य क्षेत्र के सड़क संपर्क को और मजबूत करना तथा दूसरे प्रमुख मार्गों से कनेक्टिविटी बेहतर बनाना है।
जमीन अधिग्रहण पर खर्च होंगे हजारों करोड़
तीनों एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में जमीन अधिग्रहण अहम चरण होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 8,200 हेक्टेयर भूमि जुटाने के लिए 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने की संभावना है। हालांकि, वास्तविक लागत और निर्माण की समयसीमा परियोजनाओं की आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

0 comments:
Post a Comment