दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में 31.69 करोड़ से अधिक कार्यदिवस सृजित किए गए हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने और गांवों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार की गारंटी
इस योजना की प्रमुख विशेषता ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन के अकुशल शारीरिक श्रम का रोजगार देने का कानूनी प्रावधान बताया गया है। इसका मकसद ग्रामीण परिवारों की आमदनी को सहारा देना और रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन की जरूरत कम करना है। योजना के तहत मजदूरी की दर संबंधित सरकारी अधिसूचना के अनुसार निर्धारित होती है। उपलब्ध जानकारी में प्रतिदिन 300 से 450 रुपये तक मजदूरी मिलने का उल्लेख है, लेकिन वास्तविक दर राज्य और लागू नियमों के आधार पर जांचनी चाहिए।
महिलाओं की भागीदारी 61 प्रतिशत से अधिक
योजना के आंकड़ों में महिला श्रमिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कुल श्रमिकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 61.65 प्रतिशत दर्ज की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में योजना की भूमिका सामने आती है। आंकड़ों के मुताबिक, देश के 2.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों के करीब 2.81 करोड़ कामगारों को उनकी मांग के आधार पर रोजगार मिला है।
बैंक खातों में सीधे भेजी जा रही मजदूरी
मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अब तक 3.76 करोड़ DBT लेनदेन किए गए हैं। इसके अलावा, देशभर में 15.17 करोड़ ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। डिजिटल भुगतान से मजदूरी सीधे बैंक खातों में पहुंचाने में मदद मिलती है।
ग्राम पंचायतों में चल रहे विकास कार्य
योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में रोजगार के साथ टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2.31 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में विकास कार्य संचालित हो रहे हैं और करीब 20.16 लाख कार्यस्थल सक्रिय हैं। वहीं, 2.83 लाख टिकाऊ ग्रामीण संपत्तियों के निर्माण का दावा किया गया है।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम तय करने के लिए विकसित ग्राम पंचायत योजना का भी उल्लेख किया गया है। ई-केवाईसी और जियो-टैगिंग जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं का उद्देश्य योजना के क्रियान्वयन और निगरानी को बेहतर बनाना है।
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