भारत की 10 महिला वैज्ञानिक जिन्होंने विज्ञान में अपनी छाप छोड़ी

नई दिल्ली: भारत में विज्ञान के क्षेत्र में महिला वैज्ञानिकों का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है। कई महिलाओं ने अपने अद्वितीय शोध और कार्य से न केवल भारतीय विज्ञान को नया दिशा दी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। यहां हम उन भारतीय महिला वैज्ञानिकों के बारे में बताएंगे, जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है और देश का नाम रोशन किया है।

1. दर्शन रंगनाथन

दर्शन रंगनाथन भारत की मशहूर रसायन वैज्ञानिक थीं। उनका जन्म 4 जून, 1941 को दिल्ली में हुआ था। दिल्ली यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली दर्शन रंगनाथन ने यूरिया चक्र और प्रोटीन संरचना पर कई महत्वपूर्ण खोजें की। वे मिरांडा कॉलेज में रसायन विज्ञान विभाग की अध्यक्ष रही। उनका योगदान भारतीय रसायन विज्ञान में महत्वपूर्ण रहा, और उनका निधन 2001 में हुआ।

2. आसिमा चटर्जी

आसिमा चटर्जी भारतीय रसायन विज्ञान की प्रमुख वैज्ञानिक थीं। उनका जन्म 23 सितंबर, 1917 को कलकत्ता में हुआ था। वे विज्ञान में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाली पहली महिला थीं। मलेरिया की रोकथाम करने वाली दवाओं पर किए गए उनके शोध को पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। 22 नवंबर, 2006 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका योगदान आज भी जीवित है।

3. डॉक्टर कादम्बिनी गांगुली

डॉक्टर कादम्बिनी गांगुली भारत की दूसरी महिला चिकित्सक थीं। उनका जन्म 18 जुलाई, 1861 को बिहार के भागलपुर में हुआ था। उन्होंने इंग्लैंड से मेडिसिन की उच्च शिक्षा प्राप्त की और वापस लौटने के बाद डफरिन अस्पताल में कार्य किया। उनकी खोजें भारतीय चिकित्सा विज्ञान में योगदान देती रहीं। उनका निधन 3 अक्टूबर, 1923 को हुआ।

4. जानकी अम्माल

जानकी अम्माल वनस्पति विज्ञान में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाली भारत की पहली महिला थीं। उनका जन्म 4 नवंबर, 1897 को केरल में हुआ था। वे अमेरिका के मिशिगन विश्वविद्यालय से बॉटनी में एम.एससी. और पीएचडी. की डिग्री प्राप्त करने के बाद गन्नों की हाइब्रिड प्रजातियों पर शोध करती रही। उनकी खोजों को दुनिया भर में सराहा गया। उनका निधन 7 फरवरी, 1984 को हुआ।

5. अन्ना मणि

अन्ना मणि भारत की प्रसिद्ध मौसम वैज्ञानिक थीं। उनका जन्म 23 अगस्त, 1918 को केरल में हुआ था। वे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग में काम करने के दौरान सौर विकिरण, ओजोन परत और वायु ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही थीं। उन्होंने मौसम के अध्ययन में कई महत्वपूर्ण खोजें कीं और भारतीय विज्ञान को एक नई दिशा दी। उनका निधन 16 अगस्त 2001 को हुआ।

6. रमन परिमाला

रमन परिमाला गणित की प्रमुख वैज्ञानिक थीं। उनका जन्म 21 नवंबर, 1948 को तमिलनाडु में हुआ था। उन्होंने मद्रास और बॉम्बे विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में प्रोफेसर रहीं। उनके कार्यों को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और श्रीनिवास रामानुजन जन्म शताब्दी पुरस्कार जैसे सम्मान मिले।

7. राजेश्वरी चटर्जी

राजेश्वरी चटर्जी कर्नाटक की पहली महिला इंजीनियर थीं। उनका जन्म 24 जनवरी, 1922 को हुआ था। उन्होंने माइक्रोवेव तकनीक में महत्वपूर्ण शोध कार्य किए और भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर के तौर पर काम किया। उनका योगदान इलेक्ट्रिकल और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय था। उनका निधन 3 सितंबर, 2010 को हुआ।

8. इरावती कर्वे

इरावती कर्वे भारतीय समाजशास्त्र और मानव विज्ञान की प्रमुख वैज्ञानिक थीं। उनका जन्म म्यांमार में हुआ था। वे पुणे के डेक्कन कॉलेज में समाजशास्त्र और मानव विज्ञान विभाग की अध्यक्ष रही। उन्होंने समाजशास्त्र और मानव विज्ञान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण शोध किए, जो भारतीय समाज और संस्कृति के अध्ययन में अहम माने जाते हैं। उनका निधन 11 अगस्त 1970 को हुआ।

9. बिभा चौधरी

बिभा चौधरी भारतीय भौतिक विज्ञानी थीं, जिनका जन्म 1913 में कलकत्ता में हुआ था। वे भौतिक विज्ञान में एम.एससी. करने वाली पहली महिला थीं और उन्होंने होमी भाभा और विक्रम साराभाई के साथ कार्य किया। उनके शोध पत्रों को प्रमुख जर्नल्स में प्रकाशित किया गया, और उन्होंने बोसोन कण की खोज में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका निधन 2 जून, 1991 को हुआ।

10. वीरा पंडिता

वीरा पंडिता भारतीय भूविज्ञानी थीं, जिन्होंने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया। विशेष रूप से उन्होंने प्राचीन भारतीय भूविज्ञान के अध्ययन में अपनी पूरी जिंदगी समर्पित की। वे भारतीय विज्ञान संस्थान में प्रोफेसर रहीं और उनका योगदान भूविज्ञान के क्षेत्र में अनमोल रहा।

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