यूपी में 3 साल से जमे कर्मचारी हटेंगे, नई ट्रांसफर नीति तैयार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से एक ही जगह जमे अधिकारियों और कर्मचारियों के दिन अब बदलने वाले हैं। राज्य सरकार नई ट्रांसफर पॉलिसी लाने की तैयारी में है, जिसका सीधा असर प्रशासनिक ढांचे पर पड़ेगा। मकसद साफ है सिस्टम में ठहराव खत्म करना और कामकाज को ज्यादा पारदर्शी बनाना।

सरकारी स्तर पर हुई बैठकों के बाद इस नीति को अंतिम रूप दिया जा चुका है और इसे जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है।

अब तय समय के बाद ट्रांसफर

नई व्यवस्था में यह साफ कर दिया गया है कि कोई भी कर्मचारी या अधिकारी एक ही जगह लंबे समय तक नहीं रहेगा। जिले में तीन साल और मंडल स्तर पर सात साल पूरा करने वालों को अनिवार्य रूप से हटाया जाएगा। खासतौर पर वे कर्मचारी जो सालों से एक ही सीट पर बैठे हैं, उन्हें बदलना सरकार की प्राथमिकता में है, ताकि प्रभाव और पकड़ जैसी शिकायतों पर लगाम लग सके।

गृह जिले में पोस्टिंग पर सख्ती

सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि निष्पक्षता बनी रहे। इसी वजह से उच्च अधिकारियों को उनके गृह जिले या गृह क्षेत्र में तैनाती से दूर रखा जाएगा। साथ ही, जिन कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं, उन्हें संवेदनशील पदों से हटाने की तैयारी है।

कितने तबादले होंगे, इसकी भी सीमा

सरकार इस प्रक्रिया को नियंत्रित रखना चाहती है, इसलिए एक तय सीमा भी रखी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के सीमित तबादले होंगे, जबकि निचले स्तर पर यह संख्या और कम रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर इसमें थोड़ी लचीलापन भी रखा गया है।

परिवार और दिव्यांग कर्मचारियों को राहत

इस बार नीति में सिर्फ सख्ती नहीं, बल्कि संवेदनशीलता भी दिख रही है। अगर पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकरी में हैं, तो उन्हें पास-पास तैनात करने की कोशिश होगी। दिव्यांग कर्मचारियों को सामान्य तबादलों से छूट दी जाएगी। वहीं अगर वे खुद स्थान बदलना चाहें, तो उनकी पसंद को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे परिवार जिनके ऊपर विशेष देखभाल की जिम्मेदारी है, उन्हें भी राहत देने का प्रस्ताव है।

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