बंगाल में किसकी बनेगी सरकार? ये 70 सीटें तय करेंगी जीत-हार

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति इस बार बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला सीधा ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच माना जा रहा है। लेकिन असली खेल उन 65 से 70 सीटों पर टिका है, जो जीत और हार का फैसला कर सकती हैं।

निर्णायक सीटों पर टिकी नजर

इस बार जिन सीटों को सबसे अहम माना जा रहा है, उनमें नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीटें शामिल हैं। इसके अलावा उत्तर 24 परगना का मतुआ बेल्ट, मुर्शिदाबाद और मालदा के अल्पसंख्यक बहुल इलाके भी चुनावी समीकरण तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। इन क्षेत्रों में पिछले चुनाव में जीत का अंतर बेहद कम रहा था, जिससे साफ है कि थोड़े से वोटों का झुकाव भी सत्ता की दिशा बदल सकता है।

दोनों दलों के बड़े दावे

आपको बता दें की इस चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार पहले से बड़ी जीत का दावा कर रही हैं। वहीं भाजपा की ओर से अमित शाह ने 170 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। दोनों ही दल अब बूथ स्तर तक अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।

वोटर लिस्ट में बदलाव से बदले समीकरण

चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं। लाखों नाम हटाए जाने से कई सीटों का गणित पूरी तरह बदल गया है। खासकर शहरी और संवेदनशील क्षेत्रों में हटाए गए वोटरों की संख्या पिछले चुनाव के जीत के अंतर से भी ज्यादा बताई जा रही है। भवानीपुर जैसे मजबूत गढ़ में भी हजारों नाम हटाए जाने से नई स्थिति बन गई है। वहीं मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से राजनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं।

क्या कहता है राजनीतिक गणित? कौन मारेगा बाजी

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जिन सीटों पर पहले मुकाबला कांटे का था, वहीं इस बार सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। मतदाता सूची में बदलाव और स्थानीय मुद्दे इन सीटों पर निर्णायक साबित होंगे। ऐसे में थोड़ी भी वोट स्विंग किसी भी पार्टी को सत्ता दिला सकती है।

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