5 यूनिट वाले नए फॉर्मूले से बदला गणित
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, इस बार फिटमेंट फैक्टर की गणना पुराने 3 यूनिट मॉडल के बजाय 5 यूनिट प्रणाली के आधार पर की गई है। इस नए दृष्टिकोण में केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की संरचना को ध्यान में रखा गया है। इसमें पत्नी, बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता को भी शामिल किया गया है, जिससे वास्तविक खर्च का बेहतर आकलन हो सके। इसी आधार पर गणना करने पर 3.833 का एक नया फिटमेंट फैक्टर सामने आया है, जिसे वैज्ञानिक और व्यावहारिक बताया जा रहा है।
बदलती जरूरतों के हिसाब से वेतन ढांचे की मांग
बैठक में यह भी कहा गया कि आज के समय में जीवनशैली काफी बदल चुकी है। पहले जहां बुनियादी जरूरतें सीमित थीं, वहीं अब शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, डिजिटल सुविधाएं और अन्य आधुनिक खर्च कर्मचारियों के बजट का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। इसी वजह से पुराना वेतन निर्धारण मॉडल 'डॉ. एक्रोयड फॉर्मूला' अब पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। कर्मचारी संगठन मानते हैं कि नए दौर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वेतन संरचना में बदलाव जरूरी है।
JCM में बनी सहमति और आगे की प्रक्रिया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्मचारी यूनियनों के बीच 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है। अब इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से वेतन आयोग के सामने पेश करने की तैयारी चल रही है। नेशनल काउंसिल (JCM) के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह मांग पूरी तरह तर्कसंगत और व्यावहारिक आधार पर तैयार की गई है। उनका तर्क है कि चूंकि वेतन संशोधन लंबे अंतराल पर होता है, इसलिए इसे वर्तमान आर्थिक जरूरतों के अनुसार होना चाहिए।
JCM क्या है?
JCM यानी संयुक्त सलाहकार मशीनरी, केंद्र सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच संवाद का एक आधिकारिक मंच है। इसकी स्थापना 1966 में की गई थी। यह मंच कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर समाधान निकालने का काम करता है।
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