चार साल बाद चीन की वापसी
पिछले कुछ वर्षों तक अमेरिका भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार बना हुआ था, लेकिन इस बार स्थिति बदल गई है। द्विपक्षीय व्यापार में तेज वृद्धि के चलते चीन ने फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। इससे पहले भी चीन कई बार इस सूची में पहले स्थान पर रह चुका है।
व्यापार 151 अरब डॉलर के पार
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत और चीन के बीच कुल व्यापार लगभग 151 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, खासकर आयात-निर्यात के क्षेत्र में।
बढ़ता व्यापार घाटा बना चुनौती
जहां व्यापार का कुल आंकड़ा बढ़ा है, वहीं भारत के लिए चिंता का कारण व्यापार घाटे में वृद्धि है। चीन से भारत का आयात तेजी से बढ़ा है, जबकि निर्यात अपेक्षाकृत कम रहा है। इसके कारण व्यापार घाटा 112 अरब डॉलर से अधिक हो गया है, जो नीति निर्माताओं के लिए एक अहम मुद्दा है।
निर्यात-आयात में असंतुलन
भारत से चीन को भेजे जाने वाले सामान में वृद्धि तो हुई है, लेकिन चीन से आने वाले उत्पादों की मात्रा कहीं अधिक है। भारत का निर्यात बढ़कर करीब 19 अरब डॉलर के आसपास पहुंचा, जबकि चीन से आयात 130 अरब डॉलर से अधिक हो गया। इस असंतुलन ने दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों की तस्वीर को स्पष्ट कर दिया है।
अमेरिका के साथ व्यापार की स्थिति
अमेरिका के साथ भारत का व्यापार भी बढ़ा है, लेकिन उसकी रफ्तार चीन की तुलना में धीमी रही। निर्यात में मामूली बढ़ोतरी हुई, जबकि आयात में वृद्धि दर्ज की गई। इसी वजह से अमेरिका अब दूसरे स्थान पर आ गया है।

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