सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, पेट्रोलियम, इंजीनियरिंग और खनन जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन ने भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति को और मजबूत किया है। इसके साथ ही 'मेक इन इंडिया' पहल का प्रभाव भी अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है
लगातार बढ़ता निर्यात प्रदर्शन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वित्त वर्ष में भारत के निर्यात में लगभग 4 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय उत्पादों और सेवाओं की मांग बनी रही, जिससे देश का निर्यात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सका।
मार्च बना सबसे मजबूत महीना
वित्त वर्ष के अंतिम महीने मार्च 2026 में निर्यात ने जोरदार छलांग लगाई। इस दौरान वस्तु निर्यात अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। आखिरी तिमाही की यह मजबूती पूरे वर्ष के प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में निर्णायक साबित हुई।
पेट्रोलियम और इंजीनियरिंग सेक्टर
निर्यात में सबसे बड़ा योगदान पेट्रोलियम उत्पादों और इंजीनियरिंग वस्तुओं का रहा। पेट्रोलियम रिफाइनिंग क्षमता और वैश्विक ऊर्जा मांग ने इस क्षेत्र को मजबूती दी, जबकि मशीनरी, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और औद्योगिक उपकरणों की मांग ने भी निर्यात को गति दी।
छोटे और बड़े दोनों क्षेत्रों का योगदान
इस उपलब्धि में सिर्फ बड़े उद्योग ही नहीं, बल्कि खनिज, कृषि उत्पाद और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों का भी अहम योगदान रहा। विभिन्न क्षेत्रों से मिली यह भागीदारी भारत की निर्यात संरचना को और मजबूत बनाती है। निर्यात वृद्धि में सेवा क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। आईटी सेवाओं और व्यावसायिक क्षेत्रों की मजबूत मांग के चलते सेवा निर्यात ने पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

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