इस बीच विभिन्न कर्मचारी संगठन अपनी-अपनी मांगें आयोग के सामने रख रहे हैं, जिनमें वेतन संरचना से लेकर भत्तों और सुविधाओं तक कई बड़े बदलावों की बात कही गई है।
न्यूनतम वेतन को लेकर बड़ी मांग
कर्मचारी संगठनों ने प्रस्ताव रखा है कि मौजूदा ₹18,000 के न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर लगभग ₹69,000 किया जाए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए यह जरूरी है। इस बदलाव के साथ फिटमेंट फैक्टर को भी 3.833 तक बढ़ाने की मांग की गई है, जिससे कुल वेतन संरचना में बड़ा सुधार हो सकता है।
सालाना इंक्रीमेंट में बदलाव की मांग
वर्तमान में कर्मचारियों को लगभग 3% वार्षिक वेतन वृद्धि मिलती है। लेकिन नए प्रस्ताव में इसे बढ़ाकर 6% करने की मांग की गई है, जिससे कर्मचारियों की आय में तेजी से वृद्धि हो सके।
बीमा और ग्रेच्युटी की मांग
ग्रुप C और ग्रुप B कर्मचारियों के लिए उच्च बीमा कवरेज की मांग भी उठाई गई है। इसके तहत क्रमशः ₹1 करोड़ और ₹1.5 करोड़ का ग्रुप इंश्योरेंस प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा ग्रेच्युटी नियमों में भी सुधार की बात कही गई है।
बोनस और प्रमोशन पर जोर
संगठनों ने यह भी मांग रखी है कि वेतन और महंगाई भत्ते पर कम से कम 30 दिनों के बोनस की गारंटी दी जाए। साथ ही यह भी सुझाव दिया गया है कि 30 साल की सेवा अवधि में हर कर्मचारी को कम से कम 5 प्रमोशन सुनिश्चित किए जाएं, ताकि करियर ग्रोथ बेहतर हो सके।
वेतन ढांचे में सुधार का प्रस्ताव
एक और महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि मौजूदा 18 वेतन लेवल को घटाकर 7 स्तरों में समाहित किया जाए, ताकि सिस्टम सरल और पारदर्शी बन सके। इसके अलावा फैमिली यूनिट के नियमों में भी बदलाव कर इसे 5 से बढ़ाकर 7 करने की मांग सामने आई है।

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