मुख्यमंत्री बनने के बाद बिना देरी किए उन्होंने कई जरूरी फाइलों की समीक्षा की और प्रशासनिक कामकाज को गति देने वाले फैसलों पर काम शुरू किया। मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं होगी।
1. प्रशासन में तेज कामकाज का आदेश
मुख्यमंत्री ने पहला बड़ा निर्देश देते हुए कहा कि सभी विभागों को अपने काम की गति दोगुनी करनी होगी। निर्णय लेने की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने पर जोर दिया गया, ताकि योजनाओं का लाभ जनता तक जल्दी पहुंच सके।
2. भ्रष्टाचार पर सख्त रुख के आदेश
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। सभी विभागों को चेतावनी दी गई है कि पारदर्शिता से समझौता नहीं होगा और गड़बड़ी पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
3. लंबित मामलों का जल्द निपटारा
लंबे समय से अटकी फाइलों और मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया गया है। सरकार चाहती है कि पुरानी फाइलों का बोझ खत्म हो और प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो।
4. जनता की शिकायतों का समाधान
जनता को राहत देने के लिए प्रखंड, अंचल और थाना स्तर पर आने वाली शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से बचाना है।
5. विकसित बिहार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सभी विभाग मिलकर बिहार को विकास की नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए काम करें। अनुशासन और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए एक नई प्रशासनिक व्यवस्था बनाने पर बल दिया गया है।
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