बैंकों को सख्त निर्देश
National Highways Authority of India ने सभी फास्टैग जारी करने वाले बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने रिकॉर्ड की तुरंत जांच करें। हर फास्टैग के साथ जुड़े वाहन रजिस्ट्रेशन नंबर का सत्यापन करना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
डेटा में गड़बड़ी पर सख्ती
सरकार के अनुसार कई मामलों में यह सामने आया है कि टोल प्लाजा पर दर्ज वाहन नंबर और वास्तविक नंबर प्लेट में अंतर है। इस तरह की गड़बड़ी से सरकारी राजस्व को नुकसान होता है और कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ता है।
पुराने फास्टैग में ज्यादा समस्या
जिन फास्टैग को पुराने समय में जारी किया गया था, उनमें इस तरह की त्रुटियां अधिक पाई जा रही हैं। उस समय सत्यापन प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित नहीं थी, जिससे गलतियां होना आसान था। अब सरकार सभी डेटा को एकीकृत और सही करना चाहती है।
गलत पाए जाने पर होगा ब्लैकलिस्ट
यदि जांच के दौरान किसी फास्टैग में गलत या फर्जी जानकारी पाई जाती है, तो बैंक उसे तुरंत ब्लैकलिस्ट कर देंगे। ऐसे में वाहन मालिक को टोल प्लाजा पर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
वाहन मालिकों के लिए जरूरी सलाह
सरकार ने वाहन मालिकों को सलाह दी है कि वे अपने फास्टैग की जानकारी समय-समय पर अपडेट करते रहें। सही जानकारी होने से टोल प्लाजा पर किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य टोल कलेक्शन सिस्टम को मजबूत बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना है। इससे न केवल गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी, बल्कि यात्रियों को भी बिना रुकावट बेहतर सफर का अनुभव मिलेगा।
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