यूपी में नई तबादला नीति, कर्मचारियों के लिए 4 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार कर्मचारियों के तबादलों को लेकर नई नीति लाने की तैयारी में है। उच्च स्तर पर हुई बैठकों में इस प्रस्ताव पर सहमति बन चुकी है और इसे जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल तबादलों को व्यवस्थित करना ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना है।

1 .पति-पत्नी को साथ रखने पर विशेष ध्यान

नई नीति का सबसे अहम पहलू यह है कि यदि पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं, तो उन्हें यथासंभव एक ही जिले में तैनाती देने की कोशिश की जाएगी। इससे पारिवारिक जीवन पर सकारात्मक असर पड़ेगा और कर्मचारियों को अलग-अलग स्थानों पर रहने की परेशानी से राहत मिलेगी।

2 .दिव्यांग कर्मचारियों और परिजनों को राहत

सरकार ने दिव्यांग कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए भी विशेष प्रावधान प्रस्तावित किए हैं। जिन कर्मचारियों के आश्रित 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग हैं, उन्हें स्थानांतरण से छूट देने की बात कही गई है। साथ ही, गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को उनकी सुविधा के अनुसार तैनाती देने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।

3 .तय अवधि पूरी होने पर होगा तबादला

नई नीति के तहत एक ही जिले में तीन साल और एक ही मंडल में सात साल तक सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों का तबादला किया जाएगा। इसके अलावा, जो कर्मचारी लंबे समय से एक ही पटल (डेस्क) पर कार्यरत हैं, उन्हें भी बदलकर दूसरे स्थान पर भेजा जाएगा, ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बनी रहे।

4 .तबादला प्रक्रिया के लिए तय समयसीमा

प्रस्ताव में यह भी तय किया गया है कि विभागाध्यक्षों को तबादलों की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। इससे प्रक्रिया समयबद्ध होगी और अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।

संवेदनशील पदों पर सख्ती

नई नीति में ईमानदारी और पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दी गई है। जिन कर्मचारियों की सत्यनिष्ठा संदिग्ध मानी जाती है, उन्हें संवेदनशील पदों पर तैनात नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, समूह ‘क’ के अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनाती न देने का प्रावधान भी रखा गया है। यदि उनका पद मंडल स्तर का है, तो उन्हें उसी मंडल में भी पोस्टिंग नहीं दी जाएगी।

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