जनता के साथ हुआ विश्वासघात
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन जनता की सीधी पसंद का परिणाम नहीं है। उनका कहना है कि चुनाव एक चेहरे के नाम पर लड़ा गया, लेकिन बाद में नया चेहरा सामने लाया गया। इसे उन्होंने जनता के साथ विश्वासघात करार दिया।
शिक्षा को बनाया राजनीतिक मुद्दा
उन्होंने कहा कि बिहार जैसे ज्ञान और शिक्षा की ऐतिहासिक भूमि में मुख्यमंत्री की शैक्षणिक पृष्ठभूमि को लेकर स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति की पढ़ाई को लेकर पारदर्शिता क्यों नहीं है।
गौरवशाली परंपरा का उल्लेख
प्रशांत किशोर ने बिहार की प्राचीन शैक्षणिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह भूमि नालंदा और विक्रमशिला जैसे महान शिक्षण केंद्रों की रही है। ऐसे राज्य में नेतृत्व से जवाबदेही और स्पष्टता की अपेक्षा और अधिक होती है।
सत्तापक्ष का पलटवार
वहीं, सत्तारूढ़ दल जनता दल यूनाइटेड ने नई सरकार का बचाव किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नई सरकार विकास और सुशासन की नीति को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी का कहना है कि राज्य में बुनियादी ढांचे, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं में लगातार सुधार हुआ है। महिलाओं के सशक्तिकरण और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी काम किया गया है।
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