बिहार में खत्म होगी शराबबंदी? क्या करेंगे CM सम्राट चौधरी

पटना। बिहार में शराबबंदी कानून एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। नई सरकार के गठन के बाद इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के भीतर से ही सवाल उठने लगे हैं, जिससे यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या राज्य में इस नीति की समीक्षा या बदलाव संभव है।

सरकार के अंदर से उठने लगी आवाज

सत्ताधारी गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने शराबबंदी कानून को लेकर गंभीर पुनर्विचार की मांग उठाई है। उनका कहना है कि इस कानून का असर जमीन पर उम्मीद के मुताबिक नहीं दिख रहा है, इसलिए इसकी समीक्षा जरूरी हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठा चुके हैं और आगे भी इसे मजबूती से रखते रहेंगे।

मुख्यमंत्री पर टिकी नजरें

माधव आनंद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उम्मीद जताई है कि नई सरकार इस मुद्दे पर व्यावहारिक सोच के साथ फैसला लेगी। उनके मुताबिक, बिहार जैसे राज्य में पूरी तरह शराबबंदी लागू करना कई तरह की चुनौतियां पैदा कर रहा है, जिन पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

राजस्व और व्यवस्था पर सवाल

शराबबंदी को लेकर दो तरह की राय सामने आ रही है। एक पक्ष इसे सामाजिक सुधार की दिशा में कदम मानता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे आर्थिक नुकसान और अवैध कारोबार बढ़ने की वजह बता रहा है। विपक्ष के साथ-साथ कुछ सहयोगी दलों के बयान से यह मुद्दा और गर्म हो गया है।

हालांकि इस बयान के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यह विधायक का निजी विचार है। पार्टी का आधिकारिक रुख अभी भी शराबबंदी के समर्थन में ही है और फिलहाल नीति में बदलाव की कोई औपचारिक चर्चा नहीं है।

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