क्या है महिला आरक्षण कानून
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' नाम से पारित यह कानून सितंबर 2023 में संसद से मंजूर हुआ था। इसका उद्देश्य देश की विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की व्यवस्था की गई है।
अधिसूचना में क्या कहा गया
कानून मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संविधान के 106वें संशोधन के प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को वह तिथि तय की है, जिस दिन से यह अधिनियम लागू माना जाएगा। इसी के साथ यह कानून औपचारिक रूप से प्रभाव में आ गया है।
लागू होने के समय को लेकर असमंजस
हालांकि कानून लागू कर दिया गया है, लेकिन इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि जब संसद में इस कानून के लागू होने को लेकर अलग-अलग समयसीमा पर विचार जारी है, तो इसे अभी से प्रभावी क्यों घोषित किया गया।
परिसीमन और जनगणना से जुड़ी शर्त
इस कानून के लागू होने का असली आधार आगामी जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया है। 2027 की जनगणना के बाद ही निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा, जिसके बाद ही आरक्षण व्यवस्था पूरी तरह लागू हो सकेगी। इसी कारण विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक प्रभाव 2029 या उसके बाद के चुनावों में ही दिखेगा।
संसद और विधानसभाओं में होगा असर
फिलहाल संसद में इस विषय से जुड़े कुछ अन्य विधेयकों पर भी चर्चा चल रही है, जिनका उद्देश्य 2029 से महिला आरक्षण को लागू करना बताया जा रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि कानून लागू होने के बावजूद इसकी वास्तविक शुरुआत एक लंबी प्रक्रिया के बाद ही संभव होगी।

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