8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट: न्यूनतम वेतन ₹69,000 करने की मांग तेज

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों के बीच उम्मीदें और चर्चा दोनों तेज हो गई हैं। आयोग के गठन और शुरुआती प्रक्रियाओं के बीच कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के कर्मचारी पक्ष ने सरकार को 51 पन्नों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग

कर्मचारी संगठनों ने सबसे अहम मांग यह रखी है कि मौजूदा न्यूनतम वेतन ₹18,000 को बढ़ाकर ₹69,000 किया जाए। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन के खर्चों को देखते हुए वर्तमान वेतन पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि सालाना वेतन वृद्धि यानी इंक्रीमेंट को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया जाए, ताकि कर्मचारियों की आय में तेजी से सुधार हो सके।

फिटमेंट फैक्टर पर जोर

यूनियनों ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग भी रखी है। यह वही पैमाना है जिसके आधार पर पुराने वेतन को नए वेतन ढांचे में बदला जाता है। कर्मचारियों का मानना है कि इस बदलाव से वास्तविक आय और महंगाई के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

महंगाई का असर मुख्य कारण

कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि आज शिक्षा, इलाज, किराया और रोजमर्रा के खर्चों में भारी बढ़ोतरी हो चुकी है। ऐसे में पुराना वेतन ढांचा अब व्यवहारिक नहीं रह गया है। इसी वजह से वेतन में बड़ा संशोधन जरूरी बताया जा रहा है।

अन्य मांगें भी शामिल

आपको बता दें की केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि मकान किराया भत्ता (HRA) में भी बदलाव की मांग की गई है। सुझाव दिया गया है कि इसे शहरों के हिसाब से 30%, 35% और 40% तक किया जाए। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने और पेंशन को अंतिम वेतन के 67 प्रतिशत तक बढ़ाने की भी मांग सामने आई है। हालांकि ये सिर्फ मांगे हैं अंतिम फैसला सरकार के द्वारा लिया जायेगा।

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