इन कर्मचारियों पर असर
नई नीति के अनुसार, एक ही जिले में लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को अब स्थानांतरण का सामना करना पड़ सकता है। जिन कर्मचारियों ने एक जिले में 3 साल या 7 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ट्रांसफर किया जाएगा। इसके अलावा, समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकतम 20% अधिकारियों और समूह ‘ग’ व ‘घ’ के 10% कर्मचारियों के तबादले किए जा सकेंगे।
31 मई के बाद क्या होगा?
तबादला सत्र समाप्त होने के बाद ट्रांसफर प्रक्रिया और सख्त हो जाएगी। खासकर समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए मुख्यमंत्री की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इससे अनावश्यक या मनमाने ट्रांसफर पर रोक लगाने की कोशिश की गई है।
मेरिट आधारित ऑनलाइन सिस्टम
सरकार ने इस बार तबादलों को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन और मेरिट आधारित सिस्टम लागू करने पर जोर दिया है। विशेष रूप से समूह ‘ख’ और ‘ग’ के कर्मचारियों के ट्रांसफर डिजिटल प्रक्रिया के जरिए किए जाएंगे, जिससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावना कम होगी।
आकांक्षी जिलों को दिया जायेगा प्राथमिकता
नई नीति में यह भी तय किया गया है कि आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों में खाली पदों को पहले भरा जाएगा। इससे पिछड़े क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिलेगी।
तबादले में पति-पत्नी और दिव्यांगों को मिलेगी राहत
सरकार ने मानवीय पहलुओं का भी ध्यान रखा है। पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में होने पर उन्हें एक ही जिले में तैनाती देने की कोशिश की जाएगी। दिव्यांग कर्मचारियों और विशेष जरूरत वाले बच्चों के माता-पिता को प्राथमिकता के आधार पर मनचाही जगह पोस्टिंग दी जाएगी।
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