न्यूनतम वेतन में बड़े उछाल की मांग
सबसे प्रमुख मुद्दा बेसिक सैलरी को लेकर है। वर्तमान में न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये है, जिसे बढ़ाकर करीब 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर को 3.83 गुना करने की मांग की जा रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कर्मचारियों की कुल आय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
इंक्रीमेंट और प्रमोशन सिस्टम में सुधार
वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों को हर साल 3% का इंक्रीमेंट मिलता है, जिसे बढ़ाकर 6% करने की मांग उठाई गई है। इसके अलावा करियर ग्रोथ को बेहतर बनाने के लिए 30 साल की सेवा में कम से कम पांच प्रमोशन सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
भत्तों और छुट्टियों में विस्तार
कर्मचारी संगठनों ने HRA, CEA और अन्य भत्तों को तीन गुना बढ़ाने की मांग रखी है। साथ ही इन भत्तों को महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ने की बात भी कही गई है, जिससे समय-समय पर इनमें स्वतः संशोधन होता रहे। इसके अलावा आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मेंस्ट्रुअल लीव, पितृत्व अवकाश और पैरेंट केयर लीव जैसे नए प्रावधान जोड़ने का सुझाव दिया गया है। लीव एनकैशमेंट की सीमा बढ़ाकर 600 दिन करने की मांग भी चर्चा में है।
पेंशन व्यवस्था में बदलाव की मांग
पेंशन के मुद्दे पर कर्मचारियों का रुख काफी स्पष्ट है। वे नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की जगह पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही ‘वन रैंक वन पेंशन’ जैसी व्यवस्था लागू करने और कम्यूटेड पेंशन को 11 साल बाद बहाल करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। कर्मचारियों का मानना है कि इससे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी।
क्या कहती है आगे की राह?
हालांकि ये सभी मांगें फिलहाल प्रस्ताव के रूप में हैं और अंतिम फैसला सरकार तथा वेतन आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा। फिर भी, इन मांगों ने एक स्पष्ट संकेत दे दिया है कि कर्मचारी अब वेतन और पेंशन संरचना में व्यापक बदलाव चाहते हैं। यदि सरकार इन पर सकारात्मक रुख अपनाती है, तो यह न सिर्फ कर्मचारियों के लिए बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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