सरकार ने साफ कर दिया है कि जो ठेकेदार अनुमानित लागत से 15 प्रतिशत या उससे अधिक कम दर पर काम लेते हैं, उन्हें अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा करनी होगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्यों में गिरती गुणवत्ता पर रोक लगाना और जिम्मेदारी तय करना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अक्सर देखा गया है कि कुछ ठेकेदार टेंडर पाने के लिए बहुत कम दरों पर बोली लगाते हैं। बाद में लागत कम करने के लिए वे निर्माण की गुणवत्ता से समझौता करते हैं। इससे सड़कों, पुलों और अन्य सरकारी ढांचों की मजबूती और सुरक्षा प्रभावित होती है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से ऐसी प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी।
क्या है नया नियम?
नई नीति के अनुसार यदि कोई ठेकेदार अनुमानित लागत से 15% से 20% कम दर पर टेंडर हासिल करता है, तो उसे अंतर राशि का 100% अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा करना होगा। यदि बोली 20% से भी अधिक कम है, तो उस अंतर का 150% अतिरिक्त सिक्योरिटी देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, ऐसे ठेकेदारों के वर्तमान और पिछले कार्यों की गुणवत्ता की जांच भी कराई जाएगी।
पहले क्या था नियम?
अब तक परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का प्रावधान तो था, लेकिन वह सीमित था। 40 लाख रुपये तक के कामों पर 10%, इससे अधिक लागत वाले कामों पर 5% सिक्योरिटी जमा करनी होती थी नई व्यवस्था में इसे और सख्त बनाकर गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
क्या होगा असर?
सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और केवल वही ठेकेदार आगे आएंगे जो वास्तविक लागत पर गुणवत्ता के साथ काम करने में सक्षम हैं। इससे न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि सरकारी धन का सही उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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