केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, गन्ना किसानों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। गन्ना किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। किसानों की शिकायतों पर विचार करने के लिए सरकार एक सप्ताह के भीतर उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित करेगी। सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इसमें गन्ने के दाम बढ़ाने और चीनी की कीमतों में संशोधन सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

गन्ने का भाव 550 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग

बैठक में किसानों ने बढ़ती खेती की लागत का हवाला देते हुए गन्ने का मूल्य कम से कम 550 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी। साथ ही चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये या 60 रुपये प्रति किलो करने का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों का कहना है कि मौजूदा दरों पर खेती की बढ़ती लागत निकालना मुश्किल हो रहा है।

समिति करेगी इन समस्याओं की जांच

प्रस्तावित समिति में केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों के अधिकारियों के अलावा किसान संगठनों, चीनी मिलों, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। समिति गन्ने की तौल, चीनी रिकवरी के आंकड़ों, प्रयोगशाला जांच और वजन में कटौती जैसी शिकायतों की समीक्षा करेगी। इसके बाद सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपी जाएंगी।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि किसानों के साथ किसी भी तरह का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार का जोर ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनाने पर है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

2026-27 सीजन के लिए FRP 365 रुपये

केंद्र सरकार ने चीनी सीजन 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह दर 10.25 फीसदी की बुनियादी चीनी रिकवरी पर लागू है। वहीं, किसान संगठनों की मांग है कि गन्ने का मूल्य तय करते समय चीनी के साथ एथेनॉल, खोई और बिजली जैसे सह-उत्पादों से होने वाली कमाई को भी ध्यान में रखा जाए।

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