गंभीर बीमारियों के इलाज में मिलेगी राहत
अधिवक्ताओं के सामने लंबे समय से गंभीर बीमारियों और महंगे इलाज का खर्च उठाना एक बड़ी चुनौती रहा है। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण कई बार उन्हें बेहतर उपचार कराने में परेशानी होती है। ऐसे में पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की प्रस्तावित सुविधा वकीलों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
बार काउंसिल के अनुसार, अब तक अधिवक्ताओं की चिकित्सा सहायता के लिए सीमित संसाधनों के बीच हर साल लगभग 10 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती रही है। प्रदेश में करीब पांच लाख अधिवक्ताओं को देखते हुए यह सहायता सभी जरूरतमंदों के लिए पर्याप्त नहीं थी।
बार काउंसिल ने सरकार का जताया आभार
मुख्यमंत्री की घोषणा पर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की सामान्य बैठक में प्रसन्नता व्यक्त की गई। काउंसिल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के प्रति आभार जताया। साथ ही, इस योजना को जल्द धरातल पर उतारने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। काउंसिल ने यह भी संकेत दिया कि योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर शासन से संपर्क किया जाएगा, ताकि घोषणा के अनुरूप आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
जल्द शुरू हो सकती है योजना की प्रक्रिया
अधिवक्ताओं को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में अब सरकार और बार काउंसिल के अगले कदम महत्वपूर्ण होंगे। योजना के लागू होने से संबंधित नियमों, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी सामने आने के बाद वकीलों को इसका लाभ लेने का रास्ता स्पष्ट होगा।
फिलहाल, अधिवक्ताओं को योजना के औपचारिक क्रियान्वयन और सरकार की ओर से जारी होने वाले दिशा-निर्देशों का इंतजार है। यदि यह व्यवस्था जल्द लागू होती है, तो आर्थिक रूप से कमजोर और गंभीर बीमारी से जूझ रहे अधिवक्ताओं को इलाज के खर्च से बड़ी राहत मिल सकती है।

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