नए हथियारों और मजबूत कवच से लैस
प्रस्तावित अपग्रेड में टैंकों के फायर कंट्रोल सिस्टम, इंजन और सुरक्षा कवच को बेहतर बनाने जैसे विकल्प शामिल हैं। इसका उद्देश्य टैंकों को आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों और एंटी-टैंक हथियारों जैसे खतरों से निपटने के लिए अधिक सक्षम बनाना है। हालांकि, इन बदलावों को लेकर अंतिम फैसला भारत सरकार के स्तर पर होना है।
T-14 आर्माटा पर भी रूस की नजर
रूस ने भारत के साथ भविष्य के टैंक के संयुक्त विकास में रुचि दिखाई है। इसके अलावा, उसने T-14 आर्माटा टैंक की खूबियों और उसके मॉड्यूलर डिजाइन का भी जिक्र किया है। इस टैंक में चालक दल के सदस्यों के लिए विशेष बख्तरबंद सुरक्षा कैप्सूल दिया गया है। हालांकि, भारत इस टैंक को खरीदने या इसके विकास में साझेदारी करने पर क्या फैसला लेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रस्ताव?
T-90 भारतीय सेना के प्रमुख युद्धक टैंकों में शामिल है। ऐसे में इसके आधुनिक उपकरणों, मारक क्षमता और सुरक्षा में सुधार से सेना की क्षमता बढ़ सकती है। दूसरी ओर, रूस के साथ किसी नए रक्षा समझौते पर फैसला भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल रूस का यह प्रस्ताव सामने आया है, लेकिन इसे अंतिम रक्षा समझौता मानना जल्दबाजी होगी।

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