इन मांगों में न्यूनतम बेसिक सैलरी को बढ़ाकर 69,000 रुपये करने से लेकर न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी तक के सुझाव शामिल हैं। अगर इन प्रस्तावों पर विचार किया जाता है, तो इनका असर लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी इन मांगों को सरकार या आयोग की ओर से मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
8वें वेतन आयोग की बैठक में उठे कर्मचारियों के मुद्दे
बेंगलुरु में आयोजित बैठक में कर्नाटक के केंद्रीय सरकारी पेंशनर्स से जुड़े कई संगठनों ने भाग लिया। इनमें कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट पेंशनर्स एसोसिएशन, कर्नाटक पोस्ट्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस पेंशनर्स एसोसिएशन, कर्नाटक इनकम टैक्स पेंशनर्स एसोसिएशन और कर्नाटक सेंट्रल गवर्नमेंट पेंशनर्स से जुड़े प्रतिनिधि शामिल थे।
1. न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करने की मांग
आठवें वेतन आयोग से जुड़ी प्रमुख मांगों में न्यूनतम बेसिक वेतन को बढ़ाकर 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव शामिल है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को देखते हुए वेतन संरचना में बदलाव की जरूरत है।
2. फिटमेंट फैक्टर 3.833 रखने का प्रस्ताव
फिटमेंट फैक्टर आठवें वेतन आयोग में सबसे ज्यादा चर्चा वाले विषयों में से एक है। इसका इस्तेमाल मौजूदा मूल वेतन को नए वेतन ढांचे में बदलने के लिए किया जाता है। कर्नाटक पोस्ट्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस पेंशनर्स एसोसिएशन ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर रखने का प्रस्ताव दिया है। इस मांग के पीछे उद्देश्य कर्मचारियों के मूल वेतन में पर्याप्त बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है।
3. न्यूनतम पेंशन ₹34,470 करने की मांग
पेंशनर्स संगठनों ने सेवानिवृत्त केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन में बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 3.833 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर न्यूनतम पेंशन 34,470 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। पेंशनर्स का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद चिकित्सा, आवास और दैनिक जरूरतों पर होने वाले खर्च को ध्यान में रखते हुए पेंशन व्यवस्था में सुधार जरूरी है।
4. सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 6%
कर्मचारी संगठनों ने वार्षिक वेतन वृद्धि यानी एनुअल इंक्रीमेंट की दर में बदलाव का सुझाव भी दिया है। मौजूदा व्यवस्था में सामान्य वार्षिक इंक्रीमेंट की दर 3 प्रतिशत है, जबकि संगठनों ने इसे बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने की मांग की है। इस मांग का उद्देश्य कर्मचारियों की आय में समय के साथ बेहतर बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है।
पे लेवल के विलय और फैमिली यूनिट बढ़ाने का भी सुझाव
इन प्रमुख मांगों के अलावा संगठनों ने वेतन संरचना में बदलाव और पे लेवल के विलय का मुद्दा भी उठाया। सातवें वेतन आयोग की व्यवस्था में 18 पे लेवल हैं। संगठनों का सुझाव है कि वेतन ढांचे को अधिक सरल और प्रभावी बनाने के लिए कुछ स्तरों को मिलाने पर विचार किया जाए।
इसके साथ ही फैमिली यूनिट की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया। मौजूदा व्यवस्था में परिवार की जरूरतों का आकलन करने के लिए तीन फैमिली यूनिट का आधार बताया गया है। संगठनों ने इसे बढ़ाकर पांच करने का सुझाव दिया है, ताकि परिवार के सदस्यों की जरूरतों को अधिक व्यापक रूप से ध्यान में रखा जा सके।

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