दिवाली तक बड़ी राहत! ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा चार्ज? NPCI का बड़ा एलान

नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में खरीदारी और डिजिटल भुगतान बढ़ने के बीच UPI ट्रांजैक्शन से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक, चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से संबंधित नए प्रावधानों को फिलहाल टाल दिया गया है। बताया जा रहा है कि इन्हें दिवाली के तुरंत बाद लागू करने की योजना है, जबकि नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी।

इस फैसले से दुकानदारों, व्यापारियों और डिजिटल पेमेंट से जुड़े कारोबारियों को त्योहारी कारोबार के दौरान कुछ अतिरिक्त समय मिल सकता है। हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए यह समझना जरूरी है कि MDR का संबंध मुख्य रूप से मर्चेंट पेमेंट स्वीकार करने की व्यवस्था से है। इसे सीधे ग्राहकों पर लगने वाला UPI चार्ज समझना सही नहीं होगा।

क्या है MDR और क्यों हो रही है इसकी चर्चा?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने से जुड़ी कुछ व्यवस्थाओं में व्यापारी पक्ष पर लगाया जा सकता है। UPI के जरिए दुकानों और कारोबारियों को किए जाने वाले भुगतान के संदर्भ में इस शुल्क की चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका असर पेमेंट सर्विस देने वाली कंपनियों और व्यापारियों की लागत पर पड़ सकता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में ₹2,000 से अधिक के कुछ चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR का प्रावधान बताया गया है। इस शुल्क का बंटवारा बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप्स के बीच किए जाने की बात कही गई है।

आम लोगों के लिए क्या UPI पेमेंट मुफ्त रहेगा?

UPI का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब दुकानों पर QR कोड स्कैन करके भुगतान करने के लिए पैसे देने पड़ेंगे? यहां यह समझना जरूरी है कि व्यापारी से जुड़ा MDR और ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क अलग-अलग बातें हैं।

छोटे कारोबारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

दिवाली और दूसरे त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। मिठाई की दुकानों, कपड़ों के शोरूम, किराना स्टोर, रेहड़ी-पटरी और छोटे कारोबारियों के यहां डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल भी बढ़ता है। ऐसे में भुगतान स्वीकार करने से जुड़ी लागत में बदलाव व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

यदि किसी नई शुल्क व्यवस्था को लागू करने की तारीख आगे बढ़ाई जाती है, तो कारोबारियों को अपनी भुगतान व्यवस्था समझने और नए नियमों के लिए तैयारी करने का अतिरिक्त समय मिलता है। इससे त्योहारी कारोबार के बीच अचानक बदलाव से जुड़ी परेशानी कम हो सकती है।

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