इस तिमाही में भारत को कुल 19.81 अरब डॉलर का इक्विटी निवेश मिला, जिसमें जापान की हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत रही। वहीं, अप्रैल से जून 2026 के दौरान भारत में निवेश के मामले में सिंगापुर दूसरे स्थान पर रहा। वहां से 5.22 अरब डॉलर का निवेश आया। इसके बाद मॉरीशस से 2.4 अरब डॉलर, नीदरलैंड से 1.38 अरब डॉलर और अमेरिका से 1.35 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया।
7 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य
जापान ने वर्ष 2025 में भारत में एक दशक से अधिक की अवधि के दौरान 10 लाख करोड़ येन, यानी करीब 7 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का लक्ष्य रखा था। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, जापानी कंपनियां इस दिशा में निवेश कर रही हैं। भारत में बढ़ता बाजार, कुशल कार्यबल और विनिर्माण की संभावनाएं जापानी कारोबारियों को आकर्षित कर रही हैं।
भारत की ओर बढ़ रहा जापानी निवेश?
वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापारिक तनाव, उत्पादन लागत और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों के बीच जापानी कंपनियां अपने कारोबार के लिए नए ठिकाने तलाश रही हैं। भारत उन्हें बड़े उपभोक्ता बाजार के साथ उत्पादन, तकनीक और कारोबारी सेवाओं के विस्तार का अवसर देता है।
MUFG का बड़ा सौदा बना चर्चा का विषय
जापानी निवेश में तेजी के पीछे वित्तीय क्षेत्र के बड़े सौदों की भी अहम भूमिका रही है। अप्रैल 2026 में MUFG बैंक ने श्रीराम फाइनेंस में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए 39,618 करोड़ रुपये का सौदा किया था। इस तरह के निवेश से संकेत मिलता है कि जापानी कंपनियां भारत में केवल कारखाने लगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वित्तीय सेवाओं, डिजिटल ढांचे और कारोबारी विस्तार में भी अवसर तलाश रही हैं।
जापानी कंपनियों के लिए तैयार हो रहा माहौल
भारत के नौ राज्यों में जापानी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए 12 जापानी औद्योगिक टाउनशिप विकसित की गई हैं। यहां बुनियादी सुविधाओं, सरकारी मंजूरियों और कारोबारी जरूरतों को आसान बनाने पर जोर दिया गया है। इससे कंपनियों को भारत में अपना कारोबार स्थापित करने और बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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