यूपी में दादा की संपत्ति पर पोते का कितना अधिकार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दादा की संपत्ति पर पोते के अधिकार की स्थिति भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के तहत निर्धारित होती है। यदि दादा की संपत्ति अविभाजित है, तो पोते को उस संपत्ति में अधिकार होगा, क्योंकि वह अपने पिता के माध्यम से दादा का उत्तराधिकारी है।

यूपी में दादा की संपत्ति पर पोते का कितना अधिकार। 

हिंदू कानून के तहत: यदि दादा की संपत्ति हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अंतर्गत आती है, तो पोते को उस संपत्ति में अधिकार होगा। यदि दादा की संपत्ति विभाजित नहीं हुई है, तो पोते को अपने पिता के हिस्से के अनुसार संपत्ति में अधिकार मिलेगा।

विभाजन की स्थिति: अगर दादा ने अपनी संपत्ति का विभाजन कर लिया है और अपने पुत्रों को हिस्से दे दिए हैं, तो पोते का अधिकार उस संपत्ति पर निर्भर करेगा कि उसके पिता को कितनी संपत्ति मिली थी। इसी के तहत पोता उसपर अपना दावा कर सकता हैं। 

स्व-अर्जित संपत्ति: दादा की स्व-अर्जित संपत्ति पर पोते का कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं होता। दादा की मृत्यु के बाद कोई वसीयत नहीं है, तो उनकी संपत्ति उनके तत्काल कानूनी वारिसों को मिलेगी। इन वारिसों में दादा की पत्नी, बेटा, और बेटी शामिल हैं। 

पैतृक संपत्ति: अगर दादा की संपत्ति पैतृक संपत्ति है, तो पोते का उसमें कानूनी अधिकार होता है। पैतृक संपत्ति वह संपत्ति है जो दादा को अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है। इस संपत्ति पर पोते का जन्मसिद्ध अधिकार होता है पोता ऐसी संपत्ति पर दावा कर सकता हैं।

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