क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
सरकार के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई मामलों में पेंशन से जुड़े फॉर्म अधूरे या गलत तरीके से भरे हुए महालेखाकार कार्यालय को भेजे जा रहे थे। इस वजह से फाइलें बार-बार वापस हो जाती थीं और कर्मचारियों को उनके हक के पैसे मिलने में देरी होती थी।
अब क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था के तहत अब हर विभाग को पेंशन प्रक्रिया के लिए एक अनिवार्य चेकलिस्ट तैयार करनी होगी। पेंशन फॉर्म के साथ यह चेकलिस्ट भेजना जरूरी होगा, सभी जानकारी सही और पूरी होने की पुष्टि करनी होगी, इसके बाद ही फाइल महालेखाकार कार्यालय को भेजी जाएगी, इस कदम से अधूरी फाइलों की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
सरकार ने इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए उच्च स्तर पर निर्देश जारी किए हैं। सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, जिलाधिकारियों और कोषागार पदाधिकारियों को अपने अधीन कार्यालयों में इस नियम का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
नए नियम में जिम्मेदारी भी तय
नए नियम के अनुसार, जिस विभाग में कर्मचारी कार्यरत रहा है, वही विभाग उसके रिटायरमेंट से जुड़े सभी लाभों जैसे पेंशन और अन्य भुगतान के लिए जिम्मेदार होगा। इससे जवाबदेही तय होगी और प्रक्रिया में तेजी आएगी।
नई व्यवस्था से क्या होगा फायदा?
इस नई प्रणाली से पेंशन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, फाइलों की अनावश्यक देरी कम होगी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर भुगतान मिलेगा।
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