हर यूनिट होगी हाईटेक और सुविधाजनक
प्रत्येक बीपीएचयू का निर्माण लगभग 50 लाख रुपये की लागत से किया जाएगा। इनमें इंचार्ज कक्ष, पंजीकरण कक्ष, वेटिंग रूम, सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ होंगी। खास बात यह है कि इनका निर्माण मौजूदा पीएचसी और सीएचसी के भीतर कराया जाएगा, ताकि पहले से मौजूद स्वास्थ्य ढांचे का बेहतर उपयोग किया जा सके और ब्लॉक स्तर पर सेवाओं की पहुंच आसान हो।
मरीजों की सुविधा और खर्च की बचत
इस योजना के लागू होने से ग्रामीण इलाकों के मरीजों को छोटी-बड़ी जांच और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अब दूर नहीं जाना पड़ेगा। सुविधाएं नजदीक होने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी, साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में भी सुधार आएगा।
जिलाधिकारी की निगरानी में होगा काम
बीपीएचयू निर्माण और संचालन का समन्वय जिलाधिकारी के निर्देशन में किया जाएगा। जिला पंचायत स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर समस्त कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार सुनिश्चित करेगी। ब्लॉक और ग्राम पंचायतें भी अपने क्षेत्र के स्वास्थ्य ढांचे की योजना बनाने और निगरानी में सक्रिय रूप से शामिल होंगी।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए
पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि यह योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक यूनिट को हाईटेक और सक्षम बनाया जाएगा, जिससे ब्लॉक स्तर पर मरीजों को सुविधाजनक और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें।
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