महिला आरक्षण अधिनियम 2023 और उसकी जरूरत
साल 2023 में पारित इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान रखा गया था। हालांकि, इसे लागू करने की शर्त नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ी गई थी, जिसके कारण यह अब तक प्रभावी नहीं हो पाया। अब सरकार इस शर्त को संशोधित कर जल्द से जल्द कानून लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
लोकसभा में बढ़ेगा महिलाओं का प्रतिनिधित्व
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला आरक्षण लागू होने पर लोकसभा की सीटें वर्तमान 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी। इनमें से लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह कदम महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वास्तविक शक्ति प्रदान करेगा और संसद में उनकी भूमिका को मजबूत करेगा।
संविधान में संशोधन है जरूरी
परिसीमन से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन करना होगा। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होगा। इस प्रक्रिया के तहत सरकार को विपक्षी दलों से भी समर्थन जुटाना होगा।
राजनीतिक सहमति
हालांकि, संसद में सरकार के पास अकेले पर्याप्त संख्या बल नहीं है। भाजपा के पास लोकसभा में 240 और राज्यसभा में 103 सांसद हैं। इसलिए महिला आरक्षण को लागू करने के लिए विरोधी दलों का समर्थन जरूरी होगा। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस विषय पर पहले ही विपक्षी नेताओं से संपर्क कर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
अगले कदम
अधिकारियों का कहना है कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद, यह विधेयक अगले हफ्ते सबसे पहले राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। इस फैसले से न सिर्फ संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि भारतीय राजनीति में महिलाओं की उपस्थिति को स्थायी और प्रभावशाली बनाने का मार्ग भी खुल जाएगा।

0 comments:
Post a Comment